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Home > Blog > ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह, किन भावों में होंगे मंगलकारी | इन राशियों के लिए हैं शुभ और अन्य राशियाँ करें ये उपाय

कुंडली में सभी बारह भावों की अपनी एक अलग भूमिका होती है। इन भावों में, प्रत्येक ग्रह भी अलग-अलग प्रभाव में होते हैं। आपने हमारे ‘मंगल भवन’ के पिछले लेख  में, चंद्र ग्रह  के शुभ प्रभाव किन भावों में होंगे यह जाना। आज के इस लेख में हम मंगल ग्रह के जिन भावों में शुभ प्रभाव होंगे यह जानेंगे। जिसमें, आप शुभ भाव और शुभ प्रभाव के साथ मंगल से प्रभावित शुभ राशियों के बारे में जानेंगे। साथ ही, अन्य ग्रहों के साथ ग्रहों  के सेनापति (मंगल) की युति के प्रभाव और उपाय भी बताए  हैं- हमारे साथ लेख पढ़े और लेख पसंद आने पर अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें। 

वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक नौ ग्रह का विशेष महत्व बताया गया है। जिस प्रकार, सूर्य को राजा, चंद्र को रानी ग्रह की संज्ञा दी जाती है। उसी प्रकार ‘मंगल’ ग्रह को सेनापति का नाम दिया गया है। कुंडली में मंगल ग्रह को साहस, पराक्रम, ऊर्जा, भूमि, रक्त, भाई, युद्ध, सेना और क्रोध का कारक ग्रह माना जाता है। ग्रहों के सेनापति भी इसलिए कहे गए हैं, क्योंकि उन्हें, दो राशियों का (मेष और वृश्चिक) स्वामित्व प्राप्त है। राशि चक्र में उन्हें 1 और 8 अंक से दर्शाया गया है। 

मकर राशि में वे, उच्च स्थान के होते हैं, वहीं, कर्क राशि में उनका स्थान नीच का होता है। इसके अलावा, मंगल देव को मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामित्व प्राप्त है। हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों  की गणना के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में मंगल शुभ प्रभाव में होते हैं, ऐसे जातक स्वभाव से निडर, साहसी और तेज पराक्रम वाले होते हैं। वहीं जिन जातकों की कुंडली में वें अशुभ प्रभावकारी होते हैं तो, ऐसे जातक के जीवन में बहुत सी समस्याएं आती हैं।

तो, आइए अब हम आगे लेख में जन्म कुंडली के किन भावों में मंगल ग्रह के लाभकारी परिणाम होते हैं यह जानेंगे-

हम सभी की जन्म कुंडली में 12 भाव हैं। जिसमें हर एक भाव का अपना महत्व और प्रभाव होता है। इन बारह भावों में हर एक ग्रह भी अपने अपने प्रभाव देते हैं। उसी प्रकार मंगल ग्रह के भी कुंडली के कुछ विशेष भावों में होने से लाभकारी प्रभाव होते हैं। वहीं, कुछ भावों में बेहद अशुभ फल भी देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली के ये भाव इस प्रकार हैं, जहां मंगल ग्रह जातक को मंगलकारी परिणाम देते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली के तीसरे भाव को पराक्रम या सहज भाव माना जाता है। चूंकि,मंगल को पराक्रम और तेज का कारक माना गया है। इसलिए इस भाव में मंगल जातक को श्रेष्ठ और शुभ परिणाम देते हैं। इसके साथ ही, जन्म कुंडली का तीसरा भाव भाई-बहन व कार्यक्षेत्र को भी संदर्भित करता है। इसलिए इस भाव में सेनापति ग्रह की स्थिति होने से जातक को अपने भाई-बहन का भरपूर सहयोग मिलता है। इस भाव यदि मंगल किसी शुभ ग्रह के शुभ प्रभाव में हो तो, जातक का मस्तिष्क बहुत तेज और तीव्र बुद्धि होती है।  अपनी तीव्र बुद्धि से जातक अपने कार्यक्षेत्र में बहुत सफलता प्राप्त करता है। ऐसे जातक दूसरों से अपना कार्य बनवाने में बहुत माहिर होते हैं। 

छटवां भाव ‘ऋण भाव’ कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस भाव में मंगल ग्रह का होना बहुत शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसे जातक आर्थिक रूप से समृद्ध होते हैं। जन्म कुंडली के इस भाव में मंगल की स्थिति होने से जातक शारीरिक रूप से मजबूत और बहुत संघर्षशील प्रवृत्ति का होता है। इसके साथ ही, मंगल को इस भाव के कारक ग्रह भी कहा गया है, जिससे उनका प्रभाव इस भाव में होने से जातक को सभी प्रकार के सुख मिलते हैं। 

कुंडली के दसवें भाव को ‘कर्म भाव’ कहा जाता है। इस भाव में यदि मंगल की स्थिति है तो यह बहुत ही लाभदायक मानी जाती है। इस भाव में, मंगल से प्रभावित जातक को धन लाभ होने के साथ-साथ भूमि, भवन और वाहन का सुख भी मिलता है। इतना ही नहीं, यदि इस भाव में मंगल किसी शुभ ग्रह के साथ हो तो यह जातक को मेहनत से दोगुना फल मिलता है।    

ऊपर लेख में हमने जाना की मंगल ग्रह इन भावों में बहुत ही शुभ फलदायी प्रभाव देते है। आगे लेख में हम मंगल ग्रह से प्रभावित कुछ शुभ राशियों के बारे जानेंगे-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बारह राशियों में से मंगल को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी कहा जाता है। इन राशियों को अक्सर वे शुभ प्रभाव देते हैं। यदि इन राशि के जातकों की कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत हो तो,वे बहुत ही शुभ फलदायी हैं। इसके अलावा, कन्या राशि में मंगल के गोचर से लाभ, धन प्राप्ति और कार्यस्थल पर सफलता मिलती है। वहीं, धनु राशि के जातकों के लिए भी मंगल का गोचर बहुत मंगलकारी और शुभ हो सकता है। जिससे इन राशि के जातकों को नौकरी और व्यवसाय में लाभ, सफलता और आय में वृद्धि के योग बनते हैं। 

मेष राशि के लिए मंगल ग्रह स्वामी है। जिसे इस राशि के जातकों को, मंगल ग्रह की विशेष कृपा मिलती है। ऐसे जातक साहसी और ऊर्जावान होने के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों से उबरने में सक्षम होते हैं। सही रास्ते पर चलकर धन अर्जित करते हैं।

वृश्चिक राशि के लिए मंगल का गोचर शुभ परिणाम देने वाला होता है। वे इस राशि के स्वामी भी हैं इसलिए शुभ फलदायी हैं। लाभ भाव में मंगल होने से एस राशि के जातकों को आय में वृद्धि और धन लाभ के शुभ अवसर मिलते हैं। 

ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह

कन्या राशि के लिए मंगल का गोचर उनके धन भाव में हो तो, यह एस राशि के लिए धन लाभ के योग बनाता है। जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार और कार्यस्थल पर सफलता मिलती है। इसके साथ यदि कोई अशुभ ग्रह का प्रभाव न हो तो, कन्या राशि के जातक जीवन में सभी प्रकार की सुविधाएं भी प्राप्त करते है। 

धनु राशि के जातकों को भी मंगल से शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं। यदि कुंडली के कार्यक्षेत्र के भाव में मंगल हो तो, यह जातक को बहुत तरक्की, आय के नए स्रोत और संपत्ति में निवेश से लाभ प्रदान करने वाला होता है। 

लेख में हमने जाना, कि मंगल ग्रह के कुछ विशेष भाव होते हैं जहां वे शुभ फलदायी होते हैं। कुछ राशियां ऐसी हैं, जिनमें वे शुभ परिणाम देते हैं। अन्य भावों में मंगल के परिणाम ग्रहों के साथ निर्भर करता है। आइए जानते हैं, मंगल का अन्य ग्रहों के साथ कैसे परिणाम देते हैं-    

सूर्य के साथ मंगल की युति होने से ‘ग्रहण योग’ बनता है। इस युति के कारण जातक को अपने पिता से मतभेद की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों को संपत्ति का लाभ भी नहीं मिलता है। लेकिन, कुंडली के दसवें भाव में यह लाभकारी फल देते हैं। 

चन्द्र के साथ मंगल होने से ‘लक्ष्मी योग’ बनता है। इस युति के प्रभाव से जातक की मानसिक स्थिति मजबूत होती है।  ऐसे जातक मन से बलवान और धनवान होते हैं और व्यापार से अच्छा लाभ कमाते है। 

बुध एक शुभ ग्रह हैं, मंगल के साथ बुध होने पर यह जातक को शुभ फल देते हैं। इस युति के प्रभाव से जातक राजनीति , लेखन और प्रकाशन सम्बन्धी करों में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं। साथ ही इन जातकों की तकनीक में भी अच्छी रूचि होती है। 

गुरु बृहस्पति भी बेहद शुभ परिणाम देने वाले ग्रह हैं। मंगल के साथ होने पर यह शुभ फलदायी होते हैं। जिससे जातक को ऊर्जा के साथ सही दिशा में कार्य करने की श्रेष्ठ क्षमता मिलती है। साथ ही ऐसे जातक, न्यायप्रिय और धार्मिक ग्रांटों में रूचि रखने वाले होते हैं। 

शुक्र को जीवन में लग्जरी देने वाले ग्रह मन गया है।  मंगल के साथ युति होने यह जातक में काम वासना की वृद्धि देते हैं। एस युति से प्रभावित जातक का अधिकतम समय स्त्री भोग में निकल जाता है। साथ ही यदि, इस युति पर कोई पापी ग्रह का प्रभाव या दृष्टि हो तो ऐसा जातक कामी, भोगी और हिंसक होता है। 

शनि को अनुशासनप्रिय, कर्म फल दाता की संज्ञा दी गई है, मंगल के साथ होने पर यह जातक को देर से सफलता देती है। यदि यहां शनि शुभ भाव और शुभ प्रभाव में हो तो जातक अच्छा इंजीनियर और बड़ा ठेकेदार बनता है। अगर अशुभ हो तो जातक की शत्रुता अधिक होती है और कर्जे की समस्या से जूझता है। 

रहू के साथ मंगल की युति ‘अंगारक योग’ का निर्माण करती है। यहां मंगल का क्रोध और राहु का छल मिलकर जातक में लोगों को ठगने का कार्य कराता है। ऐसे जातक झूठ अच्छा बोलते हैं। अति उत्साह में वे अपनी संपत्ति का नाश भी करते हैं। 

केतु मंगल के साथ होने पर समान फल देने वाला होता है। इस युति के होने से प्रभावित जातक की अध्यात्म में अधिक रुचि होती है। ऐसे जातक एक अच्छे शोधकर्ता भी हो सकते हैं।  लेकिन अशुभ प्रभाव होने से जातक को चोट और कुछ ना कुछ बीमारी की समस्या लगी रहती है।

मंगल को मजबूत करने व मंगल से शुभ परिणाम के लिए इन आसान ज्योतिष उपायों को करना चाहिए।

  1. मंगल को शांत करने के लिए हनुमान जी की पूजा करना सर्वश्रेष्ठ उपाय है। मंगलवार के दिन 108 तुलसी के पत्तों पर ‘श्रीराम’ नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करने से लाभ होगा।
  2. मंगलवार के दिन गुड़ और भुने हुए चने बंदर को खिलाएं या किसी हनुमान जी के मंदिर में दान करें।
  3. मंगल ग्रह के मंत्र “ओम अं अंगारकाय नम:”  “ॐ भौं भौमाय नम:” मंत्र  का जाप करें। मंगल के अशुभ प्रभाव नहीं मिलेंगे। 
  4. तांबे की धातु का दान करने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  5. मंगल की ऊर्जा को बढ़ाने के लिए “मूंगा रत्न” धारण करें, जिससे शौर्य व  साहस में वृद्धि होती है।
  6. परिवार में भाई-बहनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  7. लाल रंग मंगल के लिए उपयोगी सिद्ध है, इस रंग का प्रयोग करने से मंगल ग्रह की ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है।

Q. मंगल ग्रह के प्रभाव के लिए सबसे अधिक शुभ फलदायी कौन सा भाव है?

An. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली के तीसरे भाव को पराक्रम या सहज भाव माना जाता है। चूंकि,मंगल को पराक्रम और तेज का कारक माना गया है। इसलिए इस भाव में मंगल जातक को श्रेष्ठ और शुभ परिणाम देते हैं। इसके साथ ही, जन्म कुंडली का तीसरा भाव भाई-बहन व कार्यक्षेत्र को भी संदर्भित करता है।

Q. कौन-कौन सी राशि के लिए मंगल शुभ प्रभाव देते हैं?

An. बारह राशियों में से मंगल को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी कहा जाता है। इन राशियों को अक्सर वे शुभ प्रभाव देते हैं। यदि इन राशि के जातकों की कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत हो तो,वे बहुत ही शुभ फलदायी हैं। इसके अलावा, कन्या राशि में मंगल के गोचर से लाभ, धन प्राप्ति और कार्यस्थल पर सफलता मिलती है। वहीं, धनु राशि के जातकों के लिए भी मंगल का गोचर बहुत मंगलकारी और शुभ हो सकता है।

Q. मंगल को मजबूत करने के लिए विशेष उपाय क्या है?

An.मंगल ग्रह को शांत करने के लिए हनुमान जी की पूजा करना सर्वश्रेष्ठ उपाय है। मंगलवार के दिन 108 तुलसी के पत्तों पर ‘श्रीराम’ नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करने से लाभ होगा। इसके साथ ही, मंगलवार के दिन गुड़ और भुने हुए चने बंदर को खिलाएं या किसी हनुमान जी के मंदिर में दान करें।

Q. क्या, मंगल के साथ शनि ग्रह अशुभ फल देते हैं?

An. नहीं, यदि शुभ प्रभाव में तो, मंगल के साथ शनि के होने पर यह जातक को देर से सफलता देती है। यदि यहां शनि शुभ भाव में शुभ प्रभाव में हो तो जातक अच्छा इंजीनियर और बड़ा ठेकेदार बनता है।

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