First Call FREE
Get Your Free Kundli Today!
Home > Blog > मकर लग्न में केतु ग्रह ! शनि की इस राशि के लिए केतु ग्रह की महत्वपूर्ण स्थिति, प्रभाव और उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न की राशि में केतु ग्रह का गोचर पृथ्वी तत्व की राशि में होगा। जिससे इस लग्न में केतु का प्रभाव सौहार्दपूर्ण संबंध वाला होगा। केतु का इस प्रकार मकर राशि में होने से यह जातकों में, सामाजिक सेवाओं और मानव कल्याण में रुचि पैदा करने वाला होगा। यदि केतु इस लग्न में शुभ युति या प्रभाव में होगा तो, ऐसे जातक के सरकारी अधिकारियों के साथ संबंध अच्छे व मजबूत होंगे। साथ ही, इन जातकों में, नई चीज़ें सीखने और अपने ज्ञान में वृद्धि करने की प्रबल इच्छा रहेगी। तो,  आइए आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख  में हम आपको मकर लग्न में केतु ग्रह की विशेष स्थिति और प्रभाव के बारे में बताएंगे। इसलिए, सटीक जानकारी के लिए हमारे साथ लेख के अंत तक बने रहिए। लेख में दी गई जानकारी पसंद आने पर हमे अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर दें।

ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, मकर लग्न में केतु ग्रह तृतीयेश होकर जातक के अभक्ष्य पदार्थों का सेवन, नौकर चाकर, सहोदर, पराक्रम, भ्रम और क्रोध को प्रभावित करता है। यहाँ केतु जातक के लेखन, कंप्यूटर, अकाउंट, मोबाइल, पुरुषार्थ, साहस, शौर्य, योग्याभ्यास, दासता इत्यादि विषयों का प्रतिनिधि होता है। मकर लग्न की जन्म कुंडली में यदि केतु ग्रह अपनी दशा या महादशा काल में बलवान या शुभ प्रभाव में हो तो जातक को उपरोक्त विषयों में शुभ फल प्राप्त होते हैं। जबकि कमजोर और अशुभ प्रभाव में रहने से जातक को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

हमारे ‘मंगल भवन’ के ज्योतिष आचार्यों  के अनुसार, मकर लग्न में जन्म लेने वाला जातक का स्वभाव संतोषी, भीरु, उग्र, निरंतर पुरुषार्थ करने वाला, वंचक होता है। दिखने में ये जातक बड़े नेत्रों वाला, शठ, मनमौजी, अधिक संततिवान, चतुर, लोभी, कफ तथा वायु के पीड़ित रहने वाला, लंबे शरीर के होते हैं। इनके स्वभाव में आप इन्हें ठग, तमोगुणी, पाखंडी, आलसी, खर्चीला, धर्म से विमुख आचरण करने वाला, स्त्रियों में आसक्त, कवी तथा लज्जा रहित होता है | ऐसे जातक को अपने जीवन की प्रारंभिक अवस्था में सुख मिलता है मध्यम अवस्था में दुखी रहता है और 32 वर्ष की आयु के बाद अंत तक सुखी रहता है। इस लग्न के जातकों को  पूर्णायु प्राप्त होती है। 

मकर लग्न के स्वामी ग्रह शनि देवता हैं। केतु का प्रभाव लग्न कुंडली के विभिन्न भावों में अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर, मकर लग्न के लिए केतु को एक मारक या अशुभ ग्रह माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष भाव और स्थितियों में यह जातक को आध्यात्मिक और बौद्धिक लाभ भी देता है। आगे लेख में मकर लग्न के लिए शुभ ग्रह और केतु ग्रह के शुभ\अशुभ प्रभाव के बारे में जानेंगे-

                                                       लेख को पूरा पढ़ें-

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मकर लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए शुभ व धन प्रदाता ग्रह शनि है। इस लग्न में, धनेश शनि की शुभ स्थिति, धन स्थान से संबंध स्थापित करने वाले ग्रहों की स्थिति और यहाँ पड़ने वाले ग्रहों के दृष्टि संबंध से हम जातक के आर्थिक स्त्रोत, स्थिति और धन-संपत्ति के बारे में जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा, पंचमेश शुक्र, भाग्येश बुध, लाभेश मंगल ग्रहों की अनुकूल स्थितियां मकर लग्न के जातकों के लिए धन एवं ऐश्वर्य की वृद्धि करने में सहायक होती हैं। विशेष रूप से मकर लग्न वालों के लिए मंगल, गुरु बृहस्पति और चंद्रमा अशुभ फलदायक हैं। शुक्र और बुध शुभ फलदायक हैं, शुक्र अकेला एकमात्र ग्रह है जो, ‘राजयोग कारक’ है। शनि ग्रह लग्नेश होने के कारण मारकेश होकर भी अशुभ फल नहीं देंगे।

जिस प्रकार अन्य ग्रहों को किसी न किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त है। उसी प्रकार केतु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। उनकी अपनी कोई राशि नहीं होती है। वह अपनी मित्र राशि और शुभ भावों में ही शुभ फल देते हैं।

  • मकर लग्न कुंडली के पहले , दूसरे , नौवें , दसवें  और ग्यारहवें  (उच्च राशि ) भाव में  स्थित केतु ग्रह अपनी दशा-अंतर्दशा में अपनी क्षमतानुसार  शुभ फल देते हैं।
  • लेकिन, तीसरे , चौथे , पांचवें ( नीच राशि  ), छठे (नीच राशि ) , सातवें , आठवें  और बारहवें भाव में  स्थित केतु अपनी दशा-अंतर्दशा चलने पर जातक को कष्ट और मानसिक समस्याएं ही देते हैं। इन भावों में वह मारक ग्रह की भूमिका में होते हैं।

मकर लग्न (Capricorn Ascendant) में केतु ग्रह की स्थिति जातक के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। मकर लग्न के स्वामी शनि देवता है, जिसके साथ केतु का संबंध सामान्यतः तटस्थ या मित्रता का माना जाता है। तो चलिए जान लेते हैं, केतु का प्रभाव मकर लग्न में शुभ और अशुभ दोनों प्रकार से। 

  • यदि केतु केंद्र भाव यानी (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) या त्रिकोण भाव (पहले, पांचवें या नौवें) भावों में शुभ स्थिति में हो, तो ऐसे जातक में गहरी वैराग्य भावना और आध्यात्मिक समझ होती है। 
  • विशेष रूप से केतु के पांचवें या नवम भाव में स्थित होने से जातक को गूढ़ विद्याओं (Astrology, Research) और रहस्यों के प्रति अधिक झुकाव होता है।
  • ग्यारहवें भाव में केतु की स्थिति होने से जातक के जीवन में, आर्थिक लाभ और अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं।
  • लग्न कुंडली का बारहवां भाव मोक्ष का भाव होता है, इस भाव केतु के होने से जातक को मोक्ष का मार्ग मिलता है। साथ ही जातक धार्मिक यात्राओं और परोपकार की ओर आगे बढ़ते हैं। 
  • लग्न (प्रथम भाव) में केतु ग्रह की स्थिति होने पर जातक भ्रमित और मानसिक अशांति का शिकार होता है। उसे सिर दर्द या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • लग्न कुंडली के दूसरे भाव में केतु की स्थिति से वाणी में कड़वाहट और परिवार के सदस्यों के साथ वैचारिक मतभेद होने की स्थिति बनती है।
  • कुंडली के सातवें भाव में केतु होने पर जीवनसाथी के साथ अनबन या अलगाव की स्थिति बन सकती है।
  • दसवें भाव में केतु होने पर जातक को करियर में बार-बार बदलाव या असंतुष्टि का सामना करना पड़ सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर लग्न में केतु तीसरे भाव का स्वामी है। इसलिए, यहाँ केतु सेवक, नौकरियां, खाद्य पदार्थों का सेवन, क्रोध, भ्रम, लेखन, कंप्यूटर, मोबाइल, लेखा, प्रयास, साहस, वीरता, दासता और योग साधना जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करता है। यदि लग्न में केतु शुभ या मजबूत है, तो यह आपको उपरोक्त विषयों में शुभ फल देता है। 

मकर लग्न में केतु ग्रह


यदि मकर राशि की कुंडली में, केतु की दशा या महादशा का प्रभाव है तो, ऐसे जातक कुछ गंभीर और कुछ हद तक सुस्त प्रवृत्ति के हो सकते हैं। इस लग्न के स्वामी शनि ग्रह की शुभ या अशुभ स्थिति भी दशा के प्रभाव को प्रभावित करती है। जिससे जातक के व्यवहार पर प्रभाव होता है। यदि जन्म कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत हो, तो यह सकारात्मक और लाभकारी प्रभाव देती है। इतना ही नहीं, यह भाग्य और नए अवसरों का भी सृजन कर सकता है। 

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों  द्वारा केतु ग्रह की अशुभता को दूर करने के लिए ये कुछ आसान उपाय बताए गए हैं।  जो इस प्रकार हैं-

  1. केतु के लिए सबसे प्रभावी उपाय भगवान गणेश की आराधना करना है। बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें।
  2. केतु बीज मंत्र “ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:” का नियमित रूप से जाप करें। इसके अलावा “ॐ कें केतवे नमः” का जाप भी केतु के अशुभ प्रभाव के लिए लाभकारी होता है।
  3. भगवान काल भैरव की पूजा करने से भी केतु के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं। 
  4. आवारा कुत्तों को नियमित रूप से दूध और रोटी खिलाएं।
  5. शनिवार या बुधवार के दिन काले और सफेद रंग के कंबल, काले तिल, उड़द की दाल, नारियल या ऊनी कपड़ों का दान करें।
  6. अपंग व्यक्तियों, गरीबों या बुजुर्गों को भोजन कराएं और उनकी मदद करें। 
  7. माथे पर प्रतिदिन केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
  8. यदि केतु शुभ भावों (जैसे केंद्र या त्रिकोण) में मित्र ग्रहों के साथ हो, तो किसी विशेषज्ञ की सलाह पर लहसुनिया रत्न धारण कर सकते हैं।
  9. अपने चरित्र को शुद्ध रखें, बड़ों (विशेषकर पिता और गुरु) का सम्मान करें और दक्षिण मुखी घर में रहने से बचें।

Q. मकर लग्न में केतु ग्रह की स्थिति और प्रभाव कैसे होते हैं?

An. मकर लग्न की राशि में केतु ग्रह का गोचर पृथ्वी तत्व की राशि में होगा। जिससे इस लग्न में केतु का प्रभाव सौहार्दपूर्ण संबंध वाला होगा। केतु का इस प्रकार मकर राशि में होने से यह जातकों में, सामाजिक सेवाओं और मानव कल्याण में रुचि पैदा करने वाला होगा।

Q. मकर लग्न के लिए शुभ ग्रह कौन सा है?

An. मकर लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए शुभ व धन प्रदाता ग्रह शनि है। इसके अलावा, पंचमेश शुक्र, भाग्येश बुध, लाभेश मंगल ग्रहों की अनुकूल स्थितियां मकर लग्न के जातकों के लिए धन एवं ऐश्वर्य की वृद्धि करने में सहायक होती हैं।

Q. मकर लग्न के लिए केतु के शुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. यदि केतु केंद्र भाव यानी (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) या त्रिकोण भाव (पहले, पांचवें या नौवें) भावों में शुभ स्थिति में हो, तो ऐसे जातक में गहरी वैराग्य भावना और आध्यात्मिक समझ होती है। विशेष रूप से केतु के पांचवें या नवम भाव में स्थित होने से जातक को गूढ़ विद्याओं (Astrology, Research) और रहस्यों के प्रति अधिक झुकाव होता है

Q. मकर लग्न वालों को केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

An. केतु के लिए सबसे प्रभावी उपाय भगवान गणेश की आराधना करना है। बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और ॐ गं गणपतये नमः का जाप करें। इसके अलावा, भगवान काल भैरव की पूजा करने से भी केतु के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं

Continue Reading

Click here for Astro Call !