First Call FREE
Get Your Free Kundli Today!
Home > Blog > वृश्चिक लग्न में शुक्र ग्रह ! यह समय आपके लिए हो सकता है, चुनौतियों से भरा |

वृश्चिक लग्न में शुक्र ग्रह 

ज्योतिष शास्त्र आपको जीवन के उन पहलुओं का विस्तार से बोध कराता है, जिसकी आपको हमेशा से ही तलाश रहती है। यानी आपके भावी जीवन के लिए उचित मार्गदर्शन और सही उपाय आपके लिए ज्योतिष शास्त्र ही दे सकता है। इसके अलावा, आपकी जन्म कुंडली में, कौन सा ग्रह आपके लिए कैसा प्रभाव देने वाला है, यह जानकारी भी आपको ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से बहुत आसानी से मिल सकती है। 

तो, आइये आज के इस ‘मंगल भवन’ के लेख में हम आपको जीवन के एक और जरूरी पहलू के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।।  वृश्चिक लग्न के लिए शुक्र ग्रह के महत्वपूर्ण प्रभाव व स्थिति।  हमारे साथ लेख में, अंत तक बने रहिए और लेख में दी गई जानकारी के लिए हमें अपनी प्रतिक्रिया व सुझाव देना न भूलें।  

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृश्चिक लग्न में शुक्र ग्रह की स्थिति मारक होती है।  क्योंकि यह इस लग्न में सातवें, (जीवनसाथी, साझेदारी) और बारहवें (व्यय, हानि) भाव का स्वामी है। इसलिए, इसकी दशा में जातक को गहरे जुनून, तीव्र भावनाएं, आकर्षण और कलात्मकता के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों, स्वास्थ्य, आर्थिक मामलों में समस्याओं, अधिक व्यय, और बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, आपको जीवनसाथी के साथ सम्बन्ध और व्यापार\व्यवसाय में लाभ व स्थिरता के लिए संतुलन या त्याग करने की जरूरत हो सकती है। 

जैसा कि हमने ऊपर बताया, वृश्चिक लग्न कुण्डली में यह प्रेम के कारक ग्रह सातवें  और बारहवें भाव के स्वामी हैं।  यानी, वे लग्नेश मंगल के विरोधी दल से संबंधित होने के कारण इस कुंडली के मारक ग्रह माने जाते हैं।   इसके अलावा, इस लग्न कुण्डली में शुक्र के मारक होने के कारण वे अपनी दशा – अंतर्दशा में जातक को सदैव अशुभ फल ही देंगे। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि में, मारक ग्रह होने के कारण शुक्र ग्रह का रत्न इस कुंडली के जातक को कभी भी धारण नहीं करना चाहिए।  नहीं, तो वे अशुभ परिणाम में वृद्धि करते हैं।  

लेकिन, शुक्र ग्रह के अशुभ फल से बचने या शुक्र को मजबूत करने के लिए जातक को शुक्र से सम्बन्धित दान -पाठ व पूजन करके अशुभता को दूर किया जा सकता है।  यदि शुक्र देवता , छठे , आठवें या बारहवें भाव में विराजमान हो तो और लग्नेश मंगल बलि व शुभ हो तो यह विपरीत ‘राजयोग’ में आकर जातक को शुभ फल देने का कार्य करते हैं।  

हमारे ‘मंगल भवन’ के वरिष्ठ आचार्यों  की गणना के अनुसार, वृश्चिक लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए सबसे अधिक शुभ व धन प्रदाता ग्रह गुरु बृहस्पति है। धनेश बृहस्पति की शुभ स्थिति से धन स्थान से संबंध जोड़ने वाले ग्रहों की स्थिति से जातक की आर्थिक स्थिति के बारें में जानकारी मिलती है। 

इसके अलावा, लग्नेश मंगल, भाग्येश चंद्र और लाभेश बुध ग्रह की अनुकूल स्थितियां भी वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए धन व ऐश्वर्य में वृद्धि करने में सहायक होती हैं। वैसे, वृश्चिक लग्न के लिए बुध, मंगल, शनि ग्रह अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रह होते हैं। गुरु शुभ फलदायी होता है और सूर्य, चंद्रमा ग्रह ‘राजयोग’ कारक ग्रह होते हैं। केवल गुरु बृहस्पति मारकेश होते हुए भी मारक नहीं होते हैं।

इस लग्न के लिए, शुक्र के अस्त होने का अर्थ यह है कि शुक्र सूर्य के समान राशि में है, या कुंडली में सूर्य से अंशों में बहुत निकट है। जिसके अनुसार, यह माना जाता है कि, शुक्र के अस्त होने पर सूर्य के अत्यधिक प्रभाव के कारण उसकी शक्ति और विशिष्टता कुछ हद तक कम हो जाती है।

कुंडली में, शुक्र ग्रह प्रेम/विवाह संबंधों का कारक ग्रह होता है, इसलिए जब इस लग्न के किसी जातक की कुंडली में शुक्र अस्त होता है तो, यह जातक के प्रेम/विवाह संबंधों को प्रभावित कर सकता है। या जातक को विवाह के लिए उपयुक्त साथी खोजने में परेशानी हो सकती है।  इसके साथ ही जातक को व्यक्तिगत स्तर पर और दूसरों के साथ सामाजिक मेल-जोल बढ़ाने, रिश्तों में सामंजस्य व संतुलन के आभाव का सामना करना पड़ सकता है।  

कुंडली में अस्त अवस्था का शुक्र जातक को रिश्तों, वित्त और साझेदारी से संबंधित सही निर्णय लेने की क्षमता को अशुभ प्रकार से प्रभावित कर सकता है। जिससे आप किसी भी रिश्ते या सही स्थिति की प्रामाणिकता का आकलन करने में असमर्थ हो जाते हैं। हो सकता है आप गलत निर्णय भी ले, इसलिए इसके प्रभाव से बचने के लिए आपको उचित परामर्श लेना बहुत जरूरी है।  

जब वृश्चिक लग्न में शुक्र ग्रह सूर्य के साथ लाभकारी स्थिति में अस्त होता है, तो यह लग्न कुंडली की समग्र ग्रह और दृष्टि के आधार पर विवाह, व्यवसाय, अधिकार, नाम-प्रसिद्धि और जीवन के अन्य पहलुओं से संबंधित मामलों में अच्छे परिणाम देने का कार्य करते हैं।

दूसरी ओर, शुक्र के साथ सूर्य का अशुभ संबंध आपके स्वास्थ्य, व्यवसाय पेशे और वैवाहिक जीवन से संबंधित मामलों में समस्याएं देने का कार्य करता है। जहां, आपको अपने आवेगी और क्रोध पूर्ण व्यवहार के कारण आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

  1. बेहद आकर्षक, चुंबकीय और करिश्माई व्यक्तित्व। मधुर वाणी और सामाजिक व्यवहार में शालीनता।
  2. प्रेम संबंधों में गहराई और वफादार। जीवनसाथी के लिए समर्पित रिश्ते में स्थिरता।
  3. रक्षा, जासूसी, कंप्यूटर हैकिंग, फैशन, सर्जरी, रियल एस्टेट, कला, और अभिनय जैसे क्षेत्रों में सफलता मेहनती और रचनात्मक।
  4. रहस्यमय और गुप्त विद्याओं में रुचि। 
  1. रिश्तों में टकराव, असंतोष और समस्याएं, सभी को खुश रखना मुश्किल।
  2. आर्थिक समस्या, धन का व्यय बढ़ सकता है, कर्ज, शोक, और अपयश।
  3. आठवें भाव में शुक्र, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
  4. इच्छाओं और भावनाओं को नियंत्रित नहीं, मानसिक तनाव और संघर्ष। 

इस लग्न के लिए हमारे मंगल भवन’ के अनुभवी आचार्यों ने शुक्र से सम्बन्धित कुछ आसान उपाय यहां बताए हैं। जो इस प्रकार है-

  1. शुक्रवार के दिन, को ‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ या ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः’ मंत्र का जाप 108 बार करें।
  2. शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा करें, उन्हें सफेद पुष्प, सुगंध, दीप, धूप अर्पित करें।
  3. गाय, कुत्ते को भोजन कराएं, कोढ़ी या अंगहीन लोगों को भोजन खिलाएं।
  4. घर में संगीत-नृत्य कार्यक्रम न करें, भाई व पत्नी का सम्मान करें, चरित्र शुद्ध रखें। 
  5. वृश्चिक लग्न में शुक्र मारक ग्रह होता है, इसलिए हीरा या अन्य शुक्र रत्न धारण न करें, बल्कि शुक्र से सम्बन्धित सफेद वस्तुओं का दान करें।
  6. मंगल (लग्नेश) से संबंधित उपाय करें, क्योंकि मंगल और शुक्र की शत्रुता है और यह आपकी कुंडली में विपरीत या अशुभ प्रभाव दे सकते हैं।
  7. किसी गरीब या कुंवारी कन्या के विवाह में यथा संभव अपनी सामर्थ्य अनुसार  दान करें।

ऊपर दी गई जानकारी के अनुसार, वृश्चिक लग्न में शुक्र मारक होने की भूमिका निभाते हैं। जिसके कारण, वे अपनी दशा-अंतर्दशा में जातक को बहुत सी समस्याएं देने का कार्य करते हैं। विशेष रूप से सातवें और बारहवें भाव से संबंधित मामलों (साझेदारी, विवाह, व्यय) में जातक को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

ऐसे में, जातक को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण, रिश्तों में संतुलन और धैर्य रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि, जातक के शुक्र की ऐसी स्थिति गहन भावनाओं और भौतिक सुखों के साथ-साथ बड़ी परेशानियों का कारण भी बन सकती है। इसके बचाव के लिए आप शुक्र से सम्बन्धित दान कर अशुभ शुक्र को शांत कर सकते हैं।

Q. वृश्चिक लग्न में शुक्र की स्थिति क्या होती है?

An. वृश्चिक लग्न में शुक्र ग्रह की स्थिति मारक होती है।  क्योंकि यह इस लग्न में सातवें, (जीवनसाथी, साझेदारी) और बारहवें (व्यय, हानि) भाव का स्वामी है। इसलिए, जातक को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Q. वृश्चिक लग्न में शुक्र के शुभ प्रभाव में क्या होता है?

An. जातक बेहद आकर्षक, चुंबकीय और करिश्माई व्यक्तित्व। मधुर वाणी और सामाजिक व्यवहार में शालीनता रखने वाला होता है।

Q. वृश्चिक लग्न के लिए शुभ ग्रह कौन सा है?

An. वृश्चिक लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए सबसे अधिक शुभ व धन प्रदाता ग्रह गुरु बृहस्पति है।

Q. वृश्चिक लग्न के लिए शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए क्या उपाय है?

An. वृश्चिक लग्न में शुक्र मारक ग्रह होता है, इसलिए हीरा या अन्य शुक्र रत्न धारण न करें, बल्कि शुक्र से सम्बन्धित सफेद वस्तुओं का दान करें।

Continue Reading

Click here for Astro Call !